स्थिरं मनश्चकृषे जात ! इंद्र वेषीदेको युधये भूय सशिच्त !! ऋग्वेद 5/30/4

हे इंद्र ! यदि तुम अपने मन को स्थिर कर लो तो अकेले ही अनेक से युद्ध करने में समर्थ हो जाओ ।