शुभ महाशिवरात्रि एवं शिव नवरात्रि महोत्सव 2021

सभी तीर्थों से श्रेष्ठ,
ब्रह्मा जी द्वारा निर्मित स्थापित , महाविष्णु की राजधानी ,

देवताओं ऋषियो गण जनों द्वारा शिव को समर्पित,

महाकाल से सुशोभित
कालजयी अवंतिका पुरी तीर्थ में,
महाशिवनवरात्रि
उत्सव प्रारम्भ होने से भक्तों में अपार उत्साह है,
जहाँ श्रीगणेश जी ,

महाकाल स्वरूव भैरव गण ,

वीरभद्र जी,

समस्त
देवी –
देवता ,
ऋषि, मुनी,
यक्ष, गंधर्व ,
दैत्य, दानव,
भूत प्रेत,
गण
विभिन्न स्वरूपों में जन्म लेकर, निवास कर,
अपने 84 लाख योनियों के फल भोग रहे है,
मानव , प्राणी, पशु, पक्षी, पतंग, वृक्ष, पदार्थ या चैतन्य स्वरूप में,
उज्जयिनी में किसी न किसी हेतू से जुड़े है ,
निर्लिप्त भाव से है,

या लिप्त भाव से,
सभी महादेव के अंश है,

उनके अवतार है,

उन्ही से उतपन्न और उन्ही में विलीन हो जाने को उद्धत है,

ऐसे सभी महाकालेश्वर प्रभु के प्रजाजन धन्य है,
सभी प्राणी पृकृति सृष्टि और समूचा ब्रह्म इस शिव नवरात्रि उत्सव में सराबोर लीन है,

अनेको प्रकांड विद्धवान, विचारक, चिंतक ,
सभी का मन
शिव में हैै,
लोक के, सृष्टि के कल्याण में,
धर्म का आचरण करने में,
शुभ संकल्प धारण करने में,
सनातन मूल्यों पर और प्रतिबद्ध होने को आरूढ़ है,
काम
क्रोध
मद
लोभ
दम्भ
दुर्भाव
द्वेष
आदि मत्सरों को ,
मूड़मान्यताओ,
कुविचारों को,
सदा सदा के लिए
त्यागने हेतू

महाकाल की कनकश्रृंगा विशाला का एक एक जीव ततपर है,
यह पर्व है सदविचारों को आत्मसात करने के साथ ही,
अनुचित विचारों को सदा के लिए उन्मूलन कर उखाड़ फेंकने का है,
हम सभी स्मरण रखते हुए संकल्पित है कि
सदैव सदविचारों सद्भावनाओं
का पोषण करेंगे,
इस हेतू यज्ञ, स्वाध्याय, सत्संग, सेवा कार्यो से,

शुभ विचारों का

शिव नवरात्रि पर्व काल में और तीव्रता से प्रसार विस्तार होगा।

प्रतिज्ञा करेंगे,

तन्मेमनः शिवसंकल्प मस्त्तू

की,

हम सभी का मन, जो कि सभी कर्मेन्द्रियों ज्ञानेंद्रियों का नियंत्रक है,

राजा है , सदैव प्रतिपल शुभ और कल्याणकारी संकल्पों से युक्त हो !!
जय महाकाल
🚩🕉️🔱🔔💐🙏

महाशिवरात्रि एवं शिव नवरात्रि महोत्सव 2021

“वर्ष में एक बार ही श्री महाकालेश्वर भगवान् को हल्दी अर्पित की जाती हैं।”

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाशिवरात्रि के पहले शिव नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, इस दौरान पूरे 9 दिन तक महाकाल के दरबार में देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के विवाहोत्सव का उल्लास रहता है।

श्री महाकाल महाराज के दरबार में भगवान महाकाल और माता पार्वती के विवाह उत्सव का उल्लास, शिव नवरात्रि के प्रथम दिवस से बिखरने लगता है।

शैव मतानुसार;-

महाशिवरात्रि के 9 दिन पूर्व अर्थात; फाल्गुन कृष्ण पक्ष पंचमी से फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी महाशिवरात्रि तक शिव नवरात्रि या महाकाल नवरात्रि का 9 दिन का उत्सव बताया गया है।

मान्यतानुसार  श्री महाकालेश्वर भगवान को हल्दी अर्पित नहीं की जाती। ऐसा इसलिए क्योंकि हल्दी स्त्री सौंदर्य प्रसाधन में प्रयोग की जाती है और शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है।
एक अन्य कारण यह भी है कि हल्दी गर्म होती है और महादेव को शीतल पदार्थ अर्पित किये जाते हैं।

किन्तु इन 9 दिनों मे बाबा महाकाल को नित्य हल्दी, केशर, चन्दन का उबटन, सुगंधित इत्र, ओषधी, फलो के रस आदि से स्नान करवाया जाता है।

जिस प्रकार विवाह के दौरान दूल्हे को हल्दी लगाई जाती है। उसी प्रकार भगवान श्री महाकालेश्वर को भी हल्दी लगाई जाती है।

9 दिनों तक सांयकाल को केसर व हल्दी से भगवान महाकालेश्वर जी का अनूठा श्रृंगार किया गया ।

भगवान को हल्दी व श्रृंगार कर , उबटन लगाकर, दूल्हा बनाएंगे। भक्तों को 9 दिन तक भगवान महाकाल अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे।

शिव नवरात्रि के 9 दिन दूल्हा स्वरूप में होने वाले राजाधिराज बाबा महाकाल के श्रृंगार के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

महाशिवरात्रि के दिन भगवान महाकाल का सेहरा सजाया जाता है वर्ष 2021 में यह पर्व 3 मार्च से प्रारंभ होकर 11 मार्च 2021 तक रहेगा।