शुभ दीपावली

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ ” है परमपिता परमात्मा ईश्वर ॐ हम सभी को असत्य से सत्य की राह दिखाना, हम सभी को अज्ञानता से ज्ञान की और ले जाना, हम सभी को मृत्यु से अमरत्व तक ले चलना| ॐ शांति शांति शांति||” ” Om, Lead us from Unreality (of Transitory Existence) to the Reality (of the Eternal Self), Lead us from the Darkness (of Ignorance) to the Light (of Spiritual Knowledge), Lead us from the Fear of Death to the Knowledge of Immortality. Om Peace, Peace,….

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“निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है” भारतीय नागरिकों, लोकतंत्र की बहूत बड़ी जीत

सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्य संविधान पीठ ने एकमत लैंडमार्क ऐतिहासिक फैसले में कहा कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान से जीवन जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पूरे भाग तीन का स्वाभाविक अंग है, सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्य संविधान पीठ ने सरकार की दलील और पूर्व के दोनों निर्णय ख़ारिज करते हुए कहा कि “निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है” और यह सम्मान से जीने के अधिकार अनुच्छेद 21 में सम्मिलित है, जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार एक दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते हैं. ये वो अधिकार हैं जो मनुष्य के….

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क्या है आधार, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, होगा 30 जून से आधार अनिवार्य

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया है कि 30 जून से आधार को अनिवार्य कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कोर्ट को बताया कि अलग-अलग समाज कल्याण योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य बनाने संबंधी 30 जून की समय सीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ के सामने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि वेलफेयर स्कीम के लिए आधार को अनिवार्य बनाने का मकसद यही है कि इसका लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंचे जो अस्तित्व में ही नहीं हैं, जैसा कि सार्वजनिक….

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तत्वमसि

वेद में कई महावाक्य हैं नेति नेति (यह भी नही, यह भी नहीं) अहं ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्म हूँ) अयम् आत्मा ब्रह्म (यह आत्मा ब्रह्म है) यद् पिण्डे तद् ब्रह्माण्डे (जो पिण्ड में है वही ब्रह्माण्ड में है) वेद की  व्याख्या इन महावाक्यों से होती है। उपनिषद उद्घोष करते हैं कि मनुष्य देह, इंद्रिय और मन का संघटन मात्र नहीं है, बल्कि वह सुख-दुख, जन्म-मरण से परे दिव्यस्वरूप है, आत्मस्वरूप है। आत्मभाव से मनुष्य जगत का द्रष्टा भी है और दृश्य भी। जहां-जहां ईश्वर की सृष्टि का आलोक व विस्तार है, वहीं-वहीं उसकी पहुंच है। वह परमात्मा का अंशीभूत आत्मा है।….

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​बाहुबली the conclusion

निर्देशक राजामौली  ने भारतीय संस्कृति इतिहास का गहन अध्ययन व उपयोग कर   फिल्म नहीं, इतिहास बनाया है। बाहुबली भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे भव्यतम आकर्षक फिल्म हे। तीन घंटे में  300 बार रोंगटे खड़े हो जाएं,   फिल्म देखते समय तीन सेकेण्ड के लिए भी परदे से आँख नही हटा सकते। गत वर्षो के सबसे चर्चित प्रश्न “कंटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा” का उत्तर देने  आयी फिल्म  प्रारम्भ से ही संस्कृति और चेतना के सजीव केनवास में बांध देती है, रोचकता इतनी कि पल भर के लिए भी परदे से नजर नही हटा पाते। नायक के रणकौशल प्रदर्शन से….

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आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रणेता, ब्रह्म और जीव मूलतः और तत्वतः एक हैं

आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रणेता थे। उनके विचारोपदेश आत्मा और परमात्मा की एकरूपता पर आधारित हैं जिसके अनुसार परमात्मा एक ही समय में सगुण और निर्गुण दोनों ही स्वरूपों में रहता है। स्मार्त संप्रदाय में आदि शंकराचार्य को शिव का अवतार माना जाता है। इन्होंने ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, मांडूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक और छान्दोग्योपनिषद् पर भाष्य लिखा। वेदों में लिखे ज्ञान को एकमात्र ईश्वर को संबोधित समझा और उसका प्रचार तथा वार्ता पूरे भारत में की। उस समय वेदों की समझ के बारे में मतभेद होने पर उत्पन्न जैन और बौद्ध मतों को शास्त्रार्थों द्वारा खण्डित किया….

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वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं, पौराणिक ग्रंथों मान्यताओ के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं,उनका अक्षय फल मिलता है,इसे अत्यंत स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता हे

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की यह  तिथि अत्यंत स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी….

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अष्ट चिरंजीवी

सनातन हिंदू संस्कृति के इतिहास और पुराण अनुसार ऐसे आठ महामानव या देवता हैं, जो चिरंजीवी हैं। यह सब किसी न किसी वचन, नियम या शाप से बंधे हुए हैं और यह सभी दिव्य शक्तियों से संपन्न है। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है वे सारी शक्तियाँ इनमें विद्यमान है। यह परामनोविज्ञान जैसा है, जो परामनोविज्ञान और टेलीपैथी विद्या जैसी आज के आधुनिक साइंस की विद्या को जानते हैं वही इस पर विश्वास कर सकते हैं।  अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।अर्थात इन आठ लोगों (अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान,….

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उपनिषद

ओशो उपनिषद् की व्याख्या करते हुए कहते हैं कि आप इस सांसारिक जीवन को पूर्ण रूप से जीते हुए भी इससे उपर उठ सकते हैं। उपनिषद् जीवन विरोधि नहीं हैं और ना ही यह जीवन को अपनाने से इंकार करता है। इसका उद्देश्य संपूर्णता को पाना है। जीवन को उसकी समग्रता के साथ जीना चाहिए। यह पलायनवाद नहीं सिखाता है बल्कि यह चाहता है कि आप इस संसार में रहें लेकिन सांसारिक मोह माया से उपर उठकर अर्थात् आप इस संसार में तो रहें लेकिन इसका हिस्सा बनकर नहीं। उपनिषद् यह नहीं सिखाता कि आपको इस जीवन से बचना चाहिए.... Read more

ब्राह्मण एक धर्म है

[4:17 PM, 4/15/2017] +91 98262 22221: ब्राह्मण शब्द की व्याख्या के लिए समय का अभाव है, वो टुकड़ो टुकड़ो में नहीं समग्रता और व्यापकता में ही हो सकती है, एक बार मेने मंथन पर इस विषय को प्रस्तुत भी किया था, अब अपने ब्लॉग में कभी रखूँगा, सभी भाइयो की विशिष्ट और बहुआयामी अभिव्यक्ति को ससम्मान प्रणाम् करते हुए अभी केवल इतना लिखूंगा कि जन्मना जायते शूद्रः , संस्कारः द्विज प्रमुच्यते इसकी विस्तृत व्याख्या बाद में करेंगे, अभी तो जो वार्तालाप चल रहा है उसमें जो जो भी मेरे सीमित ज्ञान के प्रकाश में सत्य के निकट हे, उन वाक्यो….

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